Page 6 - हाऊ to
P. 6

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                                      म ॉ ही चरता  जाता ह


                                                               ॊ
                                                            ें
                                      ननत्म योज़ हभ हसाता ..रुराता
                                                     ै
                                                                                      ै
                                      ज़ज़न्दगी ह... फस चरता जाता ह
                                      एक ध ध से ननकर.. उजार की ओय
                                                ॊ
                                                                              े
                                                                                             ै
                                      योज़ ननत  नए.. सऩने फ नता जाता ह

                                      हौसरा  दता ह ...  वो उड़ता    ऩॊछी
                                                            ै
                                                     े
                                       हय स फह  जो  नतनक   रकय  जाता ह
                                                                                                   ै
                                                                                े
                                                                       े
                                      ऐसा रगता भानो   स यज से मभरकय
                                                                    े
                                                                                ै
                                      वह  प्रेभ प्रकाश  र आता ह..


                                      कबी रुका नही.. ना रुक सकता ह
                                                                                        ै
                                                  ै
                                      जीवन ह ...फस चरता जाता ह..
                                                                                   ै
                                                      ै
                                      जो आज ह.. वो   कर  क्मा होगा
                                                                                                 ै
                                      म   याज़ तो   ..सभम  ही  फतराता ह
                                         े
                                      सच..  जीवन   म ॉ  ही चरता जाता है।


                                                                   ...ववजम वभाा ..
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