Page 33 - KV Datia Magazine
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अन्यायोपार्जितं द्रव्यं दशवर्ािणि
ततष्ठतत प्राप् ते चैकादशे वर्े समुल च ववनश्यतत।
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अन्याय स उपजर्जित ककया हआ धन दश वर्ि तक रहता ह, ग्यारहवााँ वर्ि होने पर समूल नष्ट हो जाता ह।
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काक चेष्टा बको ध्यानम स्वान तनद्रा तर्ैव च अल्पाहारग ह ह यायाहव ववयायार्ी पच लक्षिम ्
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कौवा जसव इच्छा बहुला जसा ध्यान क ु त्त जसव नवद कम भोजन करने वाला और घर स मोह
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ना रखने वाला ववयायार्र्ियों म यह पांच लक्षि होना हग चाहहए
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अहो एर्ां वर जन्म सवि प्राण्युपजववनम ् । धन्या महगरूहा यभ्यो तनराशा यार्न्त नार्र्िन: ॥
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“सब प्राणियों पर उपकार करने वाल व क्षों का जन्म श्रष्ठ ह.य व क्ष धन्य ह कक र्जनक पास स याचक
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कभव तनराश नहगीँ लौटते.
Utsav Kashyap
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