Page 2 - KV Datia Magazine
P. 2

“प्राचार्य संदश”
                                                                   े
















                                             ै
        मेर  लिए  यह  प्रसन्नता  का  विषय  ह  कक  हमारा  विद्यािय  इस   िषष  िावषषक   पत्रिका  प्रकालित  कर  रहा
           े
         ै
                                                   े
                                 े
        ह।   कोरोना  महामारी  क  चिते  भी  हमार  लिक्षकों  ने  सभी  िावषषक  कायषक्रमो   को  ऑनिाइन  माध्यम
        से  समय पर संचालित कर  एक सराहनीय कायष ककया ह| पत्रिका विद्यािय की विलभन्न गततविधियों का
                                                                 ै
                                      ें
                      ै
        दपषण  होती  ह।  विद्यािय  म  लिक्षण  कायष  क  साथ  छाि-  छािाओं  क  सिागीण  विकास  हतु  अनेक
                                                        े
                                                                                  े
                                                                                        ां
                                                                                                        े
                                                                                         े
        गततविधियां  िषष  पयांत  चिती  रहती  ह  ।  पत्रिका  विद्याधथषयों  की  रचनात्मक,  िखन  कौिि   ि  मौलिक
                                               ैं
                                                        ै
        विचारों को विकलसत करने का सिक्त माध्यम ह |
                                                                    े
                                  े
                                                  े
                                                                               ं
                                                                                                  े
        मुझे  विश्िास  ह  कक  हमार  विद्याथी  आग  चिकर  प्रबुद्ि,दिभक्त  एि  विविि  कौििों  स  पररपूणष  सभ्य
                        ै
                                                                                                े
                    ें
                                          े
        नागररक  बनग  एिं  समाज  और  दि  क  विकास  म  अपना  यथासंभि  सकक्रय  योगदान  दकर  अपने  मानि
                                                           ें
                                               े
                      े
                                                                                    े
        जीिन को सफि बनाएँग। जब विद्याथी अपनी रचनाओ को  अपने नाम क साथ  दखता ह तो  उसका
                                 े
                                                                                              े
                                                                                                     ै
                                                               ष
                                                                                                          ैं
        हषष अकल्पनीय होता ह | हम अपनी रचनाओ मे लसफ अपनी  भािनाएं ही नहीं व्यक्त करते ह अवपतु
                               ै
                                                        े
                     े
             े
                                                                                             ै
        हमार अंदर क एक नए मानि, एक कवि,एक  िखक  से भी हमारा साक्षात्कार होता ह |

                                                                                                        े
                                                                                                  ं
                                          ै
        मुझे आिा ही नही िरन विश्िास ह कक पत्रिका अपने मानकों को ग्रहण करती हई लिक्षा एि उनक उद्दश्यों
                          ं
                                                                                                             े
                                                                                      ु
                                          े
                                                                          े
                       े
                                                       ें
        को साकार  करगी | इस पत्रिका क प्रकािन म सहयोग करने िाि सभी विद्याथी गण एिं अध्यापकों को
                               ं
                                         े
                          े
               ष
                                                                               ं
        मैं हार्दक बिाई दती ह और उनक उज्जिि भविष्य की कामना करती ह|
                                                                               ू
                               ू
                                                                                                            ं
        कन्रीय विद्यािय दततया द्िारा  िावषषक पत्रिका क सफि  प्रकािन क लिए मेरी हार्दक  िुभकामनाए I
                                                                             े
                                                         े
                                                                                            ष
          े




                                                                                            (Mrs. Geeta)
                                                                                                                          Principal
   1   2   3   4   5   6   7