Page 5 - KV Datia Magazine
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हमार नन्ह कप्रव
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गुरु का महत्त्व
हे गुरु जन! मर प्रिय गुरु जन!
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मैं क ु छ बोल , मैं क ु छ कह ल ,सुन लना मरी नादानी।
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बात करें बबना कस सीख , ज्ञान आपस मैं अज्ञानी।।
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पीछ की पूंक्तत में बैठा, फिर भी सहमा सहमा सा ह।
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सहपाठी हस बोल रह पर ,मैं अूंदर से गुमसुम सा ह।।
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अपन बस्त की ओट ललए मैं, झुक कर , झुक ही जाता ह।
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कहीूं नजर ना आपकी पड़ जाए,बस इसी बात से डर जाता ह।।
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गलततयाूं हो ही जाती है,मुझ दडडत करना, क्षमा भी करना।
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मर इस गुमसुम जीवन में, ज्ञान और खुलियाूं भी भरना।।
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बबना आपक मरा जीवन, बबन मल्लाह की नैया ह।
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सीख सक ूं पतवार चलाना, बन्ना मुझ खवैया ह।।
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चूंचल ह,अज्ञानी ह मैं,सातनध्य में रखना गुरुजनों।
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इस पतूंग की डोर को ,कस क े पकड़ना गुरुजनों।।
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प्रिय हैं आप सदा ही मुझको, प्रिय सदा ही मुझ रहेंग।
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हेगुरु जन!हम आपक सम्मुख, सदा है बच्चे सदा रहेंग।।
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हे गुरुजन! हम आपक सम्मुख,सदा है बच्चे सदा रहेंग।।
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अलमतेि गुप्ता (कक्षा 3A)

