Page 6 - KV Datia Magazine
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'पड़ बचाओ' 'मरा भैया है अनमोल'
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बचाया होता पड़ को, मीठ मीठ उसक बोल
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न रोना होता पट को। मरा भैया है अनमोल।।
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भोजन ककए नीींव है,। माीं का राज दुलारा है
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जीन की सीख ह।। हम सबका वो प्यारा ह।
पयाावरण को करोग नष्ट, मुख चींदा सा उसकागोल
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तो जीवन में होगा कष्ट। मरा भैया है अनमोल।।
पशु पक्षियों की करो तुम रिा, मींद मींद जब मुस्काए
जीवन को बनाओ सच्चा।। फ ू ल कमल का खल जाए।।
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प्रकतत की यह ददन है, गुड्डे जैसा गोल मटोल
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इनहहीं से ददन और रन ह। मरा भैया है अनमोल।।
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आओ ममलकर पड़ बचाएीं, चॉकलट से करता प्यार
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सुख जीवन में वापस लाएीं।। टॉफी खाता छ छ बार।
-अरनव गुप्ता (किा 2) पर मैं क्यों बोलू उसक बोल
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मरा भैया है अनमोल।।
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-सृष्ष्ट यादव (किा 4)

