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शब्दजाल





                                            शब्दों की ह अपनी महहमा
                                                          ै
                                          ना आंको कम इसकी महहमा।



                                          मीठा शब्द ममश्री - सी घोल,
                                                                              े
                                        कड़वा कड़वाहट  जीवन म घोल।
                                                                                े
                                                                         ें


                                             शब्दों का सम्यक प्रयोग,


                                         करो ना तुम इसका दुरुपयोग।



                                               शब्द ही ह भ्रम जाल,
                                                            ै
                                              शब्द ही ह माया-जाल।
                                                           ै
                                           शब्दों स ही ह आहत मान,
                                                             ै
                                                      े
                                             शब्द ही करत गुणगान।।
                                                              े


                                              शब्द ही करते उपहास,

                                          शब्दों स ही ह हास- पररहास।
                                                           ै
                                                    े
                                      शब्दों म ही समाया सृष्टट-सारांश।।
                                                 ें




                                                                                                   श्रीमती मधु गुप्ता

                                                                                                     टी. जी. टी. हहंदी
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