Page 18 - kvshivpuri
P. 18
शब्दजाल
शब्दों की ह अपनी महहमा
ै
ना आंको कम इसकी महहमा।
मीठा शब्द ममश्री - सी घोल,
े
कड़वा कड़वाहट जीवन म घोल।
े
ें
शब्दों का सम्यक प्रयोग,
करो ना तुम इसका दुरुपयोग।
शब्द ही ह भ्रम जाल,
ै
शब्द ही ह माया-जाल।
ै
शब्दों स ही ह आहत मान,
ै
े
शब्द ही करत गुणगान।।
े
शब्द ही करते उपहास,
शब्दों स ही ह हास- पररहास।
ै
े
शब्दों म ही समाया सृष्टट-सारांश।।
ें
श्रीमती मधु गुप्ता
टी. जी. टी. हहंदी

