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समय







                                        क ु छ पल खुशी से निकल जाते  है ,


                                          क ु छ पल गम में गुजर जाते  ह।
                                                                              ै

                                       इसी दौर में क ु छ िए साथी ममलते है ,


                                                                               ै
                                         और क ु छ पुराि भी बिछड़ जाते ह।
                                                          े
                                               जो समय िीत जाता है,


           वो िा जािे क्यों वापस िह ीं आ पाता है,



           लककि यदद की ककतािों में समा जाता है,
            े

           किर वह  कह ीं गुम हो जाता ह।
                                             ै

           िा जािे क्यों


           हम उस समय में लौट िह ीं पाते


           पुरािी यादों को समेट िह ीं पाते।






                                          े
                                      ऐस ह  लम्हों को याद करते रह जाते है

                                       और साल - पर - साल निकल जाते है


                                           साल पर साल निकल जाते ह।
                                                                            ै



                                                                                                          प्रजुल त्रिपरठी
                                                                                            ां

                                                                                                         8 ‘ब’
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