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अनमोल चिड़िया





               चारों ओर पहाडों से घिरा हआ एक वन था। उस वन में पीपल का
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               एक  वक्ष  भी  था  ।  उस  वक्ष  पर  एक  ववचचत्र  चचडडया  रहती  थी  जो
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                        ृ
               स्‍वर्णिम ववष्‍ठा (बीट) करती थी, अथाित ववष्‍ठा क े रूप में वह स्‍वणि


               घनष्‍काससत करती थी । उसकी धरती पर चिरते ही स्‍वणि में बदल
                                                  े़
               जाया करती थी। एक बूढे व्‍याध ने जब अपनी आंखो से इस आश्चयि

               को देखा तो उसे अपनी आंखों पर ववश्वास ही नही हआ। वह सोचने
                                                                                        ु

               लिा कक यह कै से संभव हो सकता है कक एक जंिली चचडिया  की


               ववष्‍ठा  धरती  पर  चिरते  ही  स्‍वणि    में  पररवघतित  हो  जाये।  लेककन


               उसके  सामने तो प्रत्यक्ष और प्रमाण दोनों ही मौजूद थे, इससलए  उसे


               ववश्वास करना ही पडा। व्‍याध सोचने लिा कक अिर यह चचडडया मेरे


               जाल मे फं स जाये तो मे माला माल हो जाऊं िा । इस  चचडडया को

               खूब र्खलाउंिा ताकक यह ज्‍यादा से ज्‍यादा स्‍वर्णिम ववष्‍ठा करे। यह


               ववचार कर    व्‍याध ने पीपलके  उस वक्ष पर अपना जाल डाल ददया
                                                                   ृ

               और चचडडया क े फ ंसने की प्रतीक्षा करने लिा। चचडडया ने वक्ष पर
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               पडे  जाल  को  नहीं  देखा  और  उसमें  फं स  िई।  व्‍याध    चचडडया  को

               अपने अचधकार में  लेकर खुशी-खुशी िर की ओर चल ददया । परंतु


               अचानक  ही  उसके   बढ़ते    कदम  रूक  िए    ।  वह  सोचने  लिा  कक


               चचडिया ववचचत्र है।  उसे लिा कक चचडिया  स्‍वणि ववष्‍ठा  करने वाली


               अवश्‍य है लेककन यह ककसी भूतप्रेत अथवा वपशाच का रूप हई तो
                                                                                                      ु
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