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अनुभूतिय ाँ



                                           जमीन पर रहने की आदत है मुझे



                                          क्योंकक मुझे मेरी औकात से प्यार है


                                           और फिर वह औकात फकस काम


                                              की जो जमीन पर ना फिक े


                                            और फिर इंसान फकस काम का


                                          जो अपनी औकात पर िक्र ना करें



                                             मुझे बस कोई एक बार बता दे


                                           फक अगर मेरा खुदा नहीं तो फिर


                   इस दुफनया में फजक्र क्यों है और अगर खुदा है भी तो फिर इस दुफनया वालों को

                                  इतनी फिक्र क्यों है अगर मैं अपने उत्तर पर आऊं !



                                        तो यह तो बस अनुभूफतयों का खेल है ,


                                            तभी तो यह दुफनयादारी इंसानों



                क े  फलए जेल और एक बच्चे क े  फलए खेल है! मुझे बस मेरे ईश्वर से एक ही खेद है फक,


                                               हे प्रभु मैं अगर तेरी संतान


                                               हे प्रभु मैं अगर तेरी संतान


                                               तो तू मेरे फलए भेद क्यों है


                    कहते हैं लोग फक तू सववस्व है और कोई तो समझाते इन्हे फक तू ही तो है वह



                जो इनकी अनुभूफतयों में है और अगर तू इनकी अनुभूफतयों में है तो फिर उन्हें इतनी

                                   फिक्र क्यों है तेरा शुफक्रया अदा क ै से करं  मैं प्रभु
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