तेरे उपकार मुझ पर इतने हैं! क्योंफक करता नहीं मैं क ु छ भी मेरा नाम हो रहा है इस पहेली को तो शायद प्रभु मैं कभी ना बुझा पाऊं पर एक तमन्ना है मेरे फदल में , फक बस एक बार मुझे मेरी अनुभूफतयों में कभी तेरी अनुभूफतयां ही करा दे! अमर उपाध्याय