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बढ चलो
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फ ू ल बिछ हों या काांट हों ,
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राह न अपनी छोडो तुम ।
चाह जो विपदायें आयें,
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मुख को जरा न मोडो तुम ।
साथ रह या रह न साथी,
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हहम्मत मगर न छोडो तुम ।
नह ां क ृ पा की भिक्षा माांगो,
कर न द न िन जोडो तुम ।
िस ईश्िर पर रखो िरोसा,
पाठ प्रेम का पढ चलो ।
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जि तक जान िनी हो तन म,
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ति तक आगे िढ चलो ।
व़ेदिता स िंह धाकड़
कक्षा 5“ ब''

