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मुर्गे की अकल ठिकाने
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एक समय की बात ह I एक गााँव म ढर सार मुग रहत थे I गााँव
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क बच्चे ने ककसी एक मुग को तग कर दिया था। मुगाा परशान हो
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गया I उसन सोचा अगल दिन सुबह मैं आवाज नह ं करगा। सब
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सोते रहग तब मर अहममयत सबको समझ म आएगी और मुझे
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तग नह ं करग। मुगाा अगल सुबह क ु छ नह ं बोला। सभी लोग
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समय पर उठ कर अपने - अपने काम म लग गए I इस प्रकार
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मुग को समझ म आ गया कक ककसी क बबना कोई काम नह ं
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रुकता। सबका काम चलता रहता ह।
नैतिक शिक्षा – घमंड नह ं करना चादहए।
अपर्ाा झा
कक्षा- पाांच
‘ब’

