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मरी निज भाषा
                                           े




          भाषा जब सहज बहती,



          संस्कतत, प्रकतत संग चलती।
                   ृ
                                ृ



          कम्प्यूटर क युग क दौर में,
                               े
                                             े
          थोपी जा रही अग्रजी शोर में।
                                       ं
                                          े



          आधुतिकता की कहते इस जाि,
                                                        े


          छीि रह हैं हहन्दी का रोज माि।
                         े




          हम सब ममलकर दें सम्पमाि,


          तिज भाषा पर करें अमभमाि।



                                                              अरिव स िंह जाटव




                                                तीि ‘ब’
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