Page 47 - kv itbp shivpuri demo1
P. 47
कण-कण में यौर्न
बबखराती,
ऋतु र्संत का राज-
लेकर होली आई है
जजलाने हमको आई है।
साजन! होली आई है।
खूनी और बबवर
लड़कर–मरकर
मथकर नर-शेणणत का
सगार
पा ना सका है आज –
सुधा र्ह हमने पाई है।
साजन! होली आई है।
साजन! होली आई है।
यौर्न की जय!
जीर्न की लय!
गॅूज रहा है मोहक मधुमय
उड़ते रंग-गुलाल
मस्ती जग में छाई है
साजन! होली आई है
शिवा खन्ना
दसवी ‘अ’

