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कण-कण में यौर्न


                                                                      बबखराती,

                                                                      ऋतु र्संत का राज-


                                                                                  लेकर होली आई है

                                                                            जजलाने हमको आई है।


                                                                              साजन! होली आई है।


                                                                                       खूनी और बबवर

                                                                                       लड़कर–मरकर

                                                                            मथकर नर-शेणणत का


                                                                                                  सगार


                                                                              पा ना सका है आज –


                                                                             सुधा र्ह हमने पाई है।

                                                                              साजन! होली आई है।



                                                                          साजन! होली आई है।


                                                   यौर्न की जय!

                                                   जीर्न की लय!


                                            गॅूज रहा है मोहक मधुमय


                                                  उड़ते रंग-गुलाल

                                               मस्‍ती जग में छाई है


                                                                                             साजन! होली आई है

                                                                                               शिवा खन्ना


                                                                                                            दसवी ‘अ’
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