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तििली से भी प्‍यारी






                                                             पंख अगर मिलिे तििली क े,

                                                                  दूर-दूर उड़ जािी िैं।


                                                              क ंठ  अगर पािी कोयल का,

                                                                  िीठे गीि सुनािी िैं।

                                                                पर िम्‍िी –पापा कहिे,

                                            िैं  तििली से भी  प्‍यारी ह ।
                                                                            ू
                                              राजक ु िारी से भी बढ़कर

                                                उनकी राजदुलारी ह  ।
                                                                       ू


                  रंग –बबरंगे फ्   ाक पहनकर

















                      जब िैं गीि सुनािी हूँ ।
                                                ू
                      सब कहिे है िैं कोयल से भी,

                     बढ़कर िीठा गािी हूँ।                               सौम्‍या पाटिल
                                             ू
                                                                              5 ‘अ’
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