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नया वर्ष
नया वर्ष है आया ,
संग खुशियााँ घरों में लाया।
नए साल पर सजता है घर,
अपने मन को, खुशियों की झोली से तू भर ।
नया साल है खुशियों का संगम,
इस साल दौड़कर भागेंगे तुम्हारे सारे गम।
खुशियों की बौछार यह लाया है अपने संग।
भूल जाओ ननरािाएाँ जो करती है तुम्हे तंग।
कभी हार न मानना,
यह मंत्र ववश्व में फै लाना।
करो तुम ऐसा काम,
हो जजससे देि का ऊाँ चा नाम ।
तू ककसी की भी मत सुन,
अपनी कला को तू बुन।
हर बार नया बर्ष आता है।
हर दुख को वह भगाता हैा
और दुख क े अंधेरे में,
खुशियों का प्रकाि फै लाता हैा
अनन्या गुप्ता
सात ‘ब’

