Page 45 - kv itbp shivpuri demo1
P. 45

प्रसन्नता सब गुणों की जननी है

























        आज कल प्रसन्‍नता भी दुललभ होती जा रही हैं |सब ओर लोगो क े चेहरों पर तनाव, चचिंता, दुख उदासी



        ही अचिकतर ददखाई देती है। प्रसन्‍न चेहरों का मानो अकाल ही पड गया है। यही कारण है आजकल


        क े तनावपूणल जीवन में मनुष्‍य अनेक घातक बीमाररयों का शिकार होता जा रहा है। प्रसन्‍न रहना


        स्‍वास्‍्‍य क े शलये उतना ही आवश्‍यक है जजतना कक भेाजन करना । प्रसन्‍नता वह औषचि है जो एक



        रोगी व्‍यजतत में भी उमिंग एविं उत्‍साह का सिंचार कर देती है। प्रसन्‍न रहने से िरीर में रत‍त-सिंचार


        भली पूवलक होता है। प्रसन्‍नता अनेक प्रकार क े रोगों एविं तनावों  से लडने की क्षमता प्रदान करती है।



        प्रसन्‍नता स्‍वत: ही कई अन्‍य सद्गुणों को जन्‍म देती है। प्रसन्‍न व्‍यजतत सकरात्‍मक उजाल से पररपूणल


        होता है। वह स्‍वयिं भी प्रसन्‍न रहता है  और जह  िं  जाता है , वहीिं प्रसन्‍नता बािंटता है। चाहे आप ककतने


        भी तनाव में हों, दुखी हो; ववपवि में हो जीवन क े हर क्षण का प्रसन्‍नतापूवलक स्‍वागत करें। जीवन को



        खुिहाल बनाने का नारा होना चादहये-




        “प्रसन्‍न रहों, प्रसन्‍नता बढाओ,



        जीवन को स्‍वस्‍थ एविं, खुिहाल बनाओिं |”




                                                                                       ददपाली सेन

                                                                                         9 ‘ अ’
   40   41   42   43   44   45   46   47   48   49   50