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प्रसन्नता सब गुणों की जननी है
आज कल प्रसन्नता भी दुललभ होती जा रही हैं |सब ओर लोगो क े चेहरों पर तनाव, चचिंता, दुख उदासी
ही अचिकतर ददखाई देती है। प्रसन्न चेहरों का मानो अकाल ही पड गया है। यही कारण है आजकल
क े तनावपूणल जीवन में मनुष्य अनेक घातक बीमाररयों का शिकार होता जा रहा है। प्रसन्न रहना
स्वास््य क े शलये उतना ही आवश्यक है जजतना कक भेाजन करना । प्रसन्नता वह औषचि है जो एक
रोगी व्यजतत में भी उमिंग एविं उत्साह का सिंचार कर देती है। प्रसन्न रहने से िरीर में रतत-सिंचार
भली पूवलक होता है। प्रसन्नता अनेक प्रकार क े रोगों एविं तनावों से लडने की क्षमता प्रदान करती है।
प्रसन्नता स्वत: ही कई अन्य सद्गुणों को जन्म देती है। प्रसन्न व्यजतत सकरात्मक उजाल से पररपूणल
होता है। वह स्वयिं भी प्रसन्न रहता है और जह िं जाता है , वहीिं प्रसन्नता बािंटता है। चाहे आप ककतने
भी तनाव में हों, दुखी हो; ववपवि में हो जीवन क े हर क्षण का प्रसन्नतापूवलक स्वागत करें। जीवन को
खुिहाल बनाने का नारा होना चादहये-
“प्रसन्न रहों, प्रसन्नता बढाओ,
जीवन को स्वस्थ एविं, खुिहाल बनाओिं |”
ददपाली सेन
9 ‘ अ’

