Page 12 - KV Datia Magazine
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                                          ‘कबीर दास क दोह’







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                     1)  यह तन विष की बलरी, गुरु अमत की खान ।
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                     शीश दियो जो गुरु ममल, तो भी सस्ता जान ।।
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                                                                      े
                      2)  सब धरती काजग कऱू, लखनी सब िनराज ।



                सात समुद्र की ममस कऱू ूँ , गुरु गुण मलखा न जाए ।।








                                  ऐसी िाणी बोमलए मन का आप खोय ।
                        3)                                                                       े




                        औरन को शीतल कर, आपह शीतल होए ।।
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                                                                       ुं
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                                                                                       मानिेंद्र मसुंह धाकड़

                                                                                                           th
                                                            कक्षा 7
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