Page 9 - KV Datia Magazine
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पापा
सबक घर की आन ह पापा,
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सबक घर की शान ह पापा।
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पापा स होती घर की पहचान ,
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क्योंकक इसमें छ ु पा ह अक्षर महान।।
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प स प्यार बना, प स ही पररवार बना,
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उगली पकड़कर चलना ससखाया,कदमों को लडखडान स बचाया।
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कध पर बबठाया आपन,दुननया को ददखलाया आपन,
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हानन लाभ क मूल्य को,बचपन में ही ससखलाया आपन।।
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बच्चे होते जब बडे,
ददमाग म होते य फामूूल खडे ।
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छतरी बनकर ससर पर मँडराते,
सार खतर खुद सह जाते।।
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हर पापा की एक ही आशा,
बच्चों की छ ू ट न कोई असभलाषा।
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पापा करते ऐस काम ,जजस दखकर बच्च भी करते हैं नाम ।
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पापा में बसते रहीम और राम ,सबक पापा होते महान।।
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अनूव गुप्ता (कक्षा 2 ‘B’)

