Page 10 - KV Datia Magazine
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झूठा तोता
एक बार की बात है एक जंगल में बकबक नाम का तोता रहता था। वह बहत ही झूठा था। वह
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जंगल क े दूसरी पक्षियों और जानवरों क े सामन झूठ बोलकर अपनी बडाई करता था। एक
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ददन एक पड पर एक चिडडया बैठी थी।
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वह चिडडया क पास गया और बोला की वह गांव क जमींदार क पास गया था I वहां
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पर उसन बहत सारी अच्छी अच्छी ममठाई और पकवान खाए I वह कभी जंगल क
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जानवरों क पास जाकर कहता कक मैं िील से भी ऊिा उड सकता हँ और मैन
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बहत स दशों क यात्रा की हI
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उसकी इन सभी हरकतों क कारण सार जगल को पता लग िुका था कक वह बहत
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झूठ बोलता ह। एक ददन जगल में एक बहत ही सुदर कबूतर आया। सभी पिी उस
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दखन क मलए आय। बकबक तोता भी उसस ममलन आया। तोते को दखकर कबूतर
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बोला तुम बकबक हो ना।
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यह सुनकर तोता बोला हा म ही बकबक तोता हँ। इसक बाद वह अपनी तारीफ
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करन लगा की दखा बाहर क लोग भी मुझे जानते ह। म बहत अमीर हँ। म बहत
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अच्छा खाना खाता हँ। मर पास बहत स हीर जवाहरात ह। यह सुनकर कबूतर
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बोला म शाही नौकर हँ।
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म तो तुम्ह राजा क दरबार में अच्छ दावत क मलए आमत्रत्रत करन आया था।
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लककन तुम तो पहल स ही अच्छ स रह रह हो और अच्छा खाते हो तो म िलता
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हँ। तोते न जब यह सुना तो कहन लगा की म तो बस अपनी बडाई कर रहा था।
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इसक बाद कबूतर न तोते की एक न सुनी और िला गया। यह दखकर जगल क
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सभी पिी और जानवर हॅसन लग। ख़ुशी जोशी किा 6

