Page 80 - school magazine
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....िााँ का साथ िर क ु छ अलफाज........!!!!
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सामन ककचन में माँ बड़बड़ा रही िीं..य लड़की कभी नहीं सुधरगी ! अर..समय
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स उठो र्ो स्क ु ल समय स पहचों ! इन र्ानो पर झुझलार्ी हैं ! और कई बार
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र्ो परिान करन क शलए िागर्े हए भी सोन का नाटक करर्ी हँ ! माँ का
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साि पूरी र्रह महसूस करर्ी हँ.!!
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िब पहली बार अपन िहर दूर गई र्ो माँ का बार -बार कॉल करक पुछना
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खाना -खाया , समय स पहँच र्ो गई िीं ना र्बीयर् र्ो ठीक हैं उनकी इस
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परिाह को दख कर महसूस हआ कक सकडों अनिान लोगों क बीच मैं किल
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एक माँ की गरम हिली ह िो मुझे हर समय िामें रहर्ी ह और कहर्ी ह की
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मैं र्ुझे इस दुननया की भीड़ म गुम न होन दुंगी...!!!
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सोचर्ी हँ स्िदगी क सफ़र में माँ न होर्ी र्ो कया होर्ा..? मरा स्क ु ल घर
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स िोड़ी ही दूर ह , कफर भी िह मुझे रोज़ाना छोड़न िार्ी ह ददन में उनकी
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बचन आँख दरिाि स शसफ ृ मुझे ही ढ ूंढर्ी हैं..!!
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ददनभर की इकट्ठी बार्ें िाम की चाय पर ही होर्ी ह ! रार् को िब उनस
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शलपटकर सोर्ी हँ र्ो लगर्ा ह पूरी दुननया ह मर पास..!!
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सब कहर्े ह र्ु र्ो िेर हैं रह लगी अकल लककन िेर को भी र्ो माँ की
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िऱूरर् होर्ी ह...!!! हैं ना माँ....!!!!!!
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दुननया का सबस अनमोल र्ोहफा हैं माँ....!!!
- फफजा खान
११ र्ाणिज्य

