Page 79 - school magazine
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        िैि विविधर्ा को कफर स समृद्ध बनान क शलए सबस पहल यह िरुरी ह की हम िार्ािरि
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                                                                             े
                                                                                                             े
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        सबधी मुसीबर्ों क प्रनर् अत्यर् सिदनिील हो| सड़को प दौड़र्े बड़े बड़े िाहन बड़े पैमान पर
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        प्रदूर्ि फला रह ह िो मनुष्य िानर् क शलए बहर् बड़ा खर्रा ह| िार्ािरि की िुद्धर्ा को
                                                                                  ै
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        बचान क शलए इन िाहनों पर अक ु ि लगाना होगा र्ाकक य िार्ािरि को और दूवर्र् न कर
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        पाए| फतटररयों स ननकलर्ा दूवर्र् पानी िल िीिन को िराब कर रहा ह| पानी में रहन
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        िाल िीिों की िान पर सकट पैदा हो गया ह| इस ननकलर्े दूवर्र् पानी का िल्दी स िल्दी
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                                                            ै
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        उगचर् प्रबंध करना होगा र्ाकक ये बड़ी आपदा का ऱूप न ले ले|कई दिों की सरकार लोगों क
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        बीच िैि विविधर्ा क त्रबगड़र्े सर्ुलन को लकर िागऱूकर्ा फला रही ह और कोशिि कर
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        रही ह की इस पर िल्दी काबू पाया िाय| यह आम आदमी की भी स्िममदारी ह की िह इस
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                                                                                                   ै
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        नक कायष में दहस्सा ल और िार्ािरि को िुद्ध बनान में सरकार का सहयोग कर|
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        मनुष्य क र्कनीक क प्रनर् बढ़र्े प्रम को कम करन की िरुरर् ह| िह र्कनीक और नए
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                                                                                                          े
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        नए अविष्कार करन में इर्ना मग्न हो गया ह की उस अपन आसपास क िार्ािरि क बढ़र्े
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        प्रदूर्ि  स  कोई  लना  दना  ही  नहीं  ह|  मनुष्य  को  इस  र्रफ  सोचना  होगा  की  दूवर्र्  होर्े
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        िार्ािरि स शसफ उसका ही नुकसान हो रहा ह|हर एक िनस्पनर् र्िा िीि का िार्ािरि
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        को रहन क योग्य बनान में अलग-अलग उद्दश्य ह| इसशलए अगर हमें अपन िार्ािरि की
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        िुद्धर्ा को ऊचे स्र्र र्क पहँचाना ह र्ो हमें िैि विविधर्ा क सर्ुलन को बनाय रखन पर
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        अपना ध्यान क ें दरर् करना होगा|
                                                                                                       े
                                                                                            ं
                                                                                                           े
        मनुष्य  क  शलए  यह  त्रबलक ु ल  सही  समय  ह  की  िो  इस  सकट  को  गभीरर्ा  स  ल  और
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                                                                               ं
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        िार्ािरि को िुद्ध बनान का सकल्प ल| साफ़ सुिरा िार्ािरि ही समृद्ध िैि विविधर्ा क
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        ननमाषि का आधार ह|
                                                                                        राजि क ु िार उपाध्याय
                                                                                            े
                                                                                         पी.जी.टी(जीर् पर्ज्ञान)
                                                                                     क ें द्रीय पर्द्यालय िंदसौर
                                                         मनुष्य को अपन लक्ष्य में कामयाब
                                                                                 े
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                                                         होन क शलए खुद पर विश्िास होना
                                                             ु
                                                         बहर् ज़ऱूरी है।
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