Page 78 - school magazine
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                                  सिद्ध जर् पर्पर्धता का िहत्त्र्
                                        ृ



        िैि विविधर्ा मुख्य ऱूप स एक मापदड ह स्िसमें अलग-अलग र्रह क पेड़-पौध और पिु-
                                       े
                                                                                         े
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                                                                                                    े
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                                                                                                           े
        पक्षी एक साि रहर्े ह| हर ककस्म की िनस्पनर् और पिुिगष पृथ्िी क िार्ािरि को बहर्र
                                                                                       े
                                                               े
                                                 े
        बनान में अपना अमूल्य योगदान दर्े ह स्िसस आणिरकार पृथ्िी पर िीिन समृद्धिाली
              े
                                                       ै
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                                                                                                                े
                                                                                                       ै
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                               े
        बनर्ा ह,साि ही  य सभी प्रिानर्यां एक दूसर की मूलभूर् िऱूरर्ों को पूरा करर्ी ह स्िसस
                                                                  ै
        एक समृद्धिाली िैि विविगधर्ा का ननमाषि होर्ा ह|

                                                                       ै
        िैि विविधर्ा क महत्िपूिष होन क पीछ र्क यह  ह कक यह पाररस्स्िनर्कीय प्रिाली क
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                                                       े
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        सर्ुलन को बना कर रखर्ी ह| विशभन्द्न प्रकार क पिु-पक्षी र्िा िनस्पनर् एक दूसर की
                               ै
                                                                 े
                                                                                      ै
        िऱूरर्ें  पूरी  करर्े  ह  और  साि  ही  य  एक  दूसर  पर  ननभषर  भी  ह|  उदाहरि  क  र्ौर  पर
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                                                                                                     े
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        मनुष्य को ही ल लीस्िए| अपनी मूलभूर् आिश्यकर्ा िैस भोिन और आिास  क शलए िह
                                                                                                     े
        भी पिु, पड़ और अन्द्य र्रह की प्रिानर्यों पर आगश्र् ह| हमारी िैि विविधर्ा की समृद्गध
                                                                         ै
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        ही  पृथ्िी  को  रहन  क  शलए  र्िा  िीिन  यापन  क  लायक  बनार्ी  ह|
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                                                                                                े
        एक अनुमान क मुर्ात्रबक पृथ्िी पर लगभग 3,00,000 िनस्पनर् र्िा इर्न ही िानिर ह
                                                                                                                ै
        स्िसमें पक्षी, मछशलयां, स्र्नधारी, कीड़े, सींप आदद िाशमल ह| वपछली क ु छ िर्ास्ब्दयों में
                                                                                ै
                                                                             ै
                                                                                               े
        कई िनस्पनर् एि िानिरों की प्रिानर्यां विलुप्र् हो गयी ह और आन िाल समय में कई
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                                                                                         े
                                                                            े
                                                                                    ं
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        लुप्र् होन की कग़ार पर ह| यह िैि विविधर्ा क शलए िर्र का सकर् ह|

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                                                                                                                ै
        हालाँकक वपछल कई सालों स िैि विविधर्ा को समृद्ध बनाय रखन प िोर ददया िा रहा ह
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        परर्ु  कफर  भी  क ु छ  समय  स  इसकी  गररमा  में  गगरािट  दखी  गयी  ह  स्िसकी  आन  िाल
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                                                                               ै
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        समय में और भी ज्यादा गगरन की आिका िर्ाई िा रही ह| इसक पीछ मुख्य कारि ह
                                                                                      े
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                                                                                             े
        औद्योगगक  फतटररयों  स  लगार्ार  ननकलर्ा  प्रदूर्ि|  इस  प्रदूर्ि  क  कारि  ही  कई
                                      े
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        िनस्पनर्यों की और िानिरों की प्रिानर्यां विलुप्र् हो गयी ह और कई होन की कग़ार पर
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                                                                                                           ै
        ह| वपछल क ु छ समय स मनुष्य का र्कनीक की र्रफ इर्ना ज्यादा झुकाि हो गया ह की
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                                    े
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                                                                    ै
        िह इसक दुष्पररिाम को भी नहीं समझना चाहर्ा ह| इस बदलाि का एक सकर् र्ो साफ़
                                                                                                 ं
                                                                                                             े
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        ह की आन िाल समय में हमार गृह पृथ्िी पर  बहर् ही भयकर सकट खड़ा हो िायगा|
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                                                                                        ं
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              े
        इसस िैि विविधर्ा का सर्ुलन र्ो ननस्श्चर् ऱूप स त्रबगड़ेगा ही र्िा मनुष्य क साि साि
                                                                                                   े
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                                      ं
        िीििर्ुओ क िीिन पर भी प्रश्नगचन्द्ह खड़ा हो िायगा|
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