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*इरादा तो कर वादा तो कर *
तेरी सोच में मोच नहीीं ,
तेरा मजबूत इरादा होना चाहहए
कक तेरे हौसलों की इमारत हो सबसे आगे
पीछे सारा जमाना होना चाहहए
तो आगे बढ़ और सफर का इरादा कर
अपनी हर कोशिि से तू थोड़ा ज्यादा कर
हारीं गा ना हौसला मैं उम्र भर
यह दूसरों से नही तू खुद से वादा कर
इस आसमान की ऊचाईयों को तुझे छ ू ना आना चाहहए
इस रठी ककस्मत को तुझे मनाना आना चाहहए
क्योंकक जो पत्थर हथौडे की मार से डर जाए
वह कीं कर कही खो जाता है
ओर जो वह मार सह ले
वह कीं कर –िींकर हो जाता है
तो कर क े हदखा तू काम इस कदर
कक तेरे नाम की तो शमसालें होनी चाहहए
बींद आखों से सपने तो सब देखते हैं
तेरे सपने तो खुली आखों मे होने चाहहए।
श्रुतत िुक्ला
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