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क्या खूब थे वो बचपन क े दिन

                                              वह धूप में घूमना वो पेड़ पर चढ़ना

                                            वह हर रोज खाने में आनाकानी करना

                                            वह हर काम में अपनी मनमानी करना

                                              क्या खूब थे वो बचपन क े दिन.....

                                              वह हर रोज सुबह माां का जगाना

                                            वह हर रात माां का लोरी गाकर सुलाना

                                                  पापा क े साथ मेला जाना

                                                  िािा क े साथ पाकक  जाना

                                              व िािी से हर शाम कहानी सुनना


                                                    िीिी क े साथ खेलना

                                                                                   क्या खूब थे वो बचपन क े दिन

                                                                                    नही थी कोई दचांता न तनाव

                                                                                      न थी पढ़ाई की टेंशन

                                                                               पूरा दिन दनकल जाता था यूां ही खेलने
                                                                                               में

                                                                                  वह पूरा दिन बस खेलना…….

                                                                               हर बात पर गुस्सा हो जाना और माां का
                                                                                             मनाना

                                                                                 क्या खूब थे वो बचपन क े दिन.....

                                                                               वह बचपन वह यािें रह गई बन क े कु छ
                                                                                             दकताबें

                                   अब तो भाई बस चलनी है अपने भदवष्य को बनाने की तैयारी

                                              भगवान से बस यही िुआ है रहती

                                          एक बार दिर लौटा िे मेरे बचपन क े खजाने

                                                                          क्या खूब थे वो बचपन क े दिन                                          अभय भागकव

                                                                                                         IX B
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