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मेरी कलम से ……….
पुराने दोस् तों की याद तब आती हैं
जब नए दोस् त भाते नहीं
भीड में भी अक े लेपन का अहसास तब होता है
जब साथ देने क े ललए कोई होता नहीं
अपने सपनों में तो सब शहंशाह होते है
लेलकन असल लजंदगी में
क ु छों को छोड़, हम लकसी को भाते नहीं
असललयत ख् यालों में खोजोगे तो झूठ लमलेगा
उस झूठ में लजंदगी लजओगे तो
समय आने पर लदल टूटेगा
सच भले ही कडवा हो मान लेना चालहए
झूठ भले ही मीठा हो उसे जाने देना चालहए
असललयत को अपनाक े , ख् वाबों तक पह ुचने का अलग ही मजा है
ये जो मजा है लकसी और में कह ां है ।
स् नेहा रावत
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