Page 55 - school magazine
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िाता  पपता                                 बहटयााँ
                                                                            े
                                                        बेदटयाँ परायी नही ये दो पररिारों का प्यार ह,
                                                                                                           ै
               माँ की ममर्ा सबसे प्यारी,
                                                        बेदटयाँ बोझ नही ये उस स्िगष का द्वार ह,
                                                                                                      ै
                सार िग में सबस न्द्यारी,                स्िस हम मिबूर समझर्े ह हर िक़्र्,
                    े
                                    े
                                                              े
                                                                                        ै
                                                              े
                     े
                                                                                                    ै
               सबक ददल को भाने िाली,                    िो बटी मिबूरी नही धारधार र्लिार ह,
              प्यार का मोल शसखाने िाली.
                                                                                       ै
                                                        बेदटयां माँ की िान होर्ी ह,

                                                        बेटीयाँ वपर्ा का सममान होर्ी ह,
                                                                                             ै
                                     ै
             वपर्ा का प्यार भी ह अनोखा,
                                                        िो िानर्ी हो हर दुख को भी सुख में बदलना,
                े
            सार िीिन को उमंगों से भरर्ा,
                                                        बेटीयाँ उस माँ का िरदान होर्ी ह,
                                                                                              ै
              हाि पकड़कर चलना शसखाए,
                                                                                          ै
              िीिन की नयी राह ददखायें.                  बेटीयाँ सच की प्रमाि होर्ी ह,
                                                                                            ै
                                                        बेदटयाँ घर का अशभमान होर्ी ह,
                                                        इनकी इज्िर् करना सीखो तयोंकक,
               मार् वपर्ा की सेिा करना,
                                                                ष
                                                                                      े
                                                        य शसफ लड़की नही उस दिी समान होर्ी
                                                          े
                प्यार नम्रर्ा में ही चलना,

                 सदाचार अपनार्े रहना,                                                               - श्रुतत ििाव
                                 े
              िीिन खुशियों स र्ुम भरना.
                                                                                                ११र्ी पर्ज्ञान
                               े
                          े
                 द्र्ारा दर् सहठया (६ ब)
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