Page 56 - school magazine
P. 56

सुदररयो िी खोलकर
                                                                       ं
                सुदररयो-यो-यो
                  ं
                                                                    हँसकर मर् मोनर्यों
                हो-हो

                                                                    की िर्ाष करना
                अपनी-अपनी छानर्यों पर


                                                                                               े
                दुद्धी फ ू ल क झुक डाल लो !                         काम-पीडड़र् इस भल आदमी
                                े
                                       े
                                                                    को
                नाच रोको नहीं।

                                                                    विर्-भरी हँसी स िलाओ।
                                                                                          े
                बाहर स आए हए
                          े
                                    ु
                                                                    यों, आदमी यह अच्छा है
                इस परदिी का िी साफ नहीं।
                          े
                                                                    नाच दखना
                                                                             े
                आँखें न डालना।

                                                                    सीखना चाहर्ा ह।
                                                                                          ै
                यह ‘पचाई’ नहीं
                                                                    ***Himanshu sopra***
                बोर्ल का दाऱू पीर्ा ह।
                                            ै
   51   52   53   54   55   56   57   58   59   60   61