Page 59 - school magazine
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"िरा अपनाप"                             यहााँ सब क ु छ बबकता ह
                                                                                                     ै
                           े
                                                                                                     े
                                                                 दोस्र्ों रहना िरा समभल क ।।
                   रार्ों ददन बरसों र्क
                                                                    े
                                                                                             े
                                                                                                   े
                                                                        े
                                                                               े
                                                                  बचन िाल हिा भी बच दर्े हैं,
                     मैंन उस भटकाया
                              े
                         े
                                                                                     े
                                                                        गुब्बारो म डाल क।।
                                                                                               े
                     लौटा िह बार-बार
                                                                                    ै
                                                                  सच त्रबकर्ा ह, झुठ त्रबकर्ा ह,
                                                                                                        ै
                     पार करक महराबें
                                े
                                    े
                                                                       त्रबकर्ी ह हर कहानी।।
                                                                                   ै
                          समय की
                                                                       र्ीन लोक म फला ह,
                                                                                        े
                                                                                                  ै
                                                                                           ै
                      मगर खाली हाि                                  कफर भी त्रबकर्ा ह बोर्ल म
                                                                                                        े
                                                                                           ै
                       तयोंकक मैं उस    े                                         पानी।।

               ककसी लालच में दौड़ार्ा िा                          कभी फ ू लों की र्रह मर् िीना।।
               दौड़र्ा िा िह मर इिार पर
                                           े
                                    े
                                   े
                                                                                           े
                                                                    स्िस ददन णखलोग... ट ू ट कर
                 और िैसा का र्ैसा नहीं
                                                                           त्रबखर िाओग।।
                                                                                             े
                      िका और मांदा                                   स्िन ह र्ो पत्िर की र्रह
                                                                              ै
                 लौट आर्ा िा यह कहन           े                                   स्ियो,

                                                                   स्िस ददन र्रािे गए... "खुदा"
                     कक रहन दो मुझ       े
                               े
                                                                                            े
                                                                             बन िाओग।
                         अपन पास
                               े

                        मैं हरा रहगा                                   द्वारा- दीपंिु पाटीदार ११
                                    ं
                                    ू

           िैस र्ुमहार पाँिों क नीचे की घास
                                  े
                        े
               े
                     मैंन दख शलया ह
                            े
                         े
                                         ै
             र्ुमस दूर कहीं क ु छ ह ही नहीं
                                       ै
                    े
                     हम दोनों शमलकर


                    पा सक ें ग उस यहीं
                               े
                                    े

                 िो क ु छ पान लायक ह।
                                 े
                                            ै
                                - सुक्ष्िता िकर्ाना
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