Page 69 - school magazine
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बापू क नाि पत्र
वप्रय बापू,
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आप मुझे हमिा प्रररर् करर्े हैं। आपका पूरा िीिन ही एक पाठिाला की र्रह ह।
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आपक द्िारा ककए गए कायष हमें प्ररिा दर्े हैं। हमें आपक र्ीन बदर बहर् याद आर्े हैं। ि
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बदर पिु होर्े हए भी हमें बहर् क ु छ सीख दर्े हैं और उन्द्होंन मानि धमष को अपना शलया िा
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लककन आि क मनुष्यों न पिु क अिगुिों को अपना शलया ह।
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मनुष्य आपस में लड़र्े शभडर्े रहर्े हैं और मारपीट करर्े रहर्े हैं। आपन उस समय
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अदहंसा का नारा ददया िा लककन आिकल इसक विपरीर् हर क्षि में दहंसा व्याप्र् है।
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ह! अदहंसा क पुिारी, आि का आदमी बहर् बदल गया ह। अब अदहंसा स ‘अ’ अक्षर ही
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अदृश्य हो गया ह और दहंसा चारों र्रफ बढ़र्ी िा रही ह। आपक द्िारा छ ु आछ ू र् को शमटान
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का कायष बहर् नक िा। आि भारर् में छ ु आछ ू र् काफी हद र्क शमट गया ह। सभी िानर् क
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लोग आपस में साि बैठर्े हैं। आपसी भाईचारा बढ़ गया ह। आि अनक दहंदू भी ईद क समय
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रोिा इफ्र्ार पर मुस्स्लम भाइयों क साि शमलकर भोिन करर्े हैं।
आपसी भाईचारा, प्रेम, सद्भािना आदद यही भारर् दि की पहचान बन गया ह। दूसरे
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दिों क शलए यह हरानी की बार् ह कक भारर् में विशभन्द्न सस्क ृ नर् क इर्न सार लोग एक
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साि इर्न प्रम स कस रह लर्े हैं। आपन त्रबना हगियार क किल दहंसा क दम पर दि को
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आिाद कराया। सभी भारर् िाशसयों क शलए यह गिष की बार् ह कक आपन भारर् दि में
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िन्द्म शलया और भारर् को आिाद करा कर ही दम शलया।
आपने लोगों को शिक्षा का महत्ि समझाया। आप िकालर् करने अफ्रीका गए, िहां से
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िकालर् करक कफर भारर् िापस आकर दि की सिा में लग गए यह आपके देि प्रेम को
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दिाषर्ा ह। आपका व्यस्तर्त्ि अत्यंर् सरल और साधारि ह। आप एक िांनर्वप्रय, सत्य ि प्रेम
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में आस्िा रखन िाल व्यस्तर् हैं। आि भी आप ककसी न ककसी ऱूप में हम सबक बीच अमर
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ह।
धन्द्यिाद!
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साक्षी टपि
11र्ीं ‘पर्ज्ञान’

