Page 70 - school magazine
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िध्यप्रदि का स्थापना हदर्स
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                                                                                      े
                                                                           ै
      तया आप जानते हैं फक िध्यप्रदि का स्थापना हदर्स कब ह? िध्यप्रदि का स्थापना हदर्स 1
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                                                                                                           े
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      नर्म्बर 1956 ह  िध्यप्रदि की राजधानी भोपाल ह जबफक सबसे बडा िहर इदौर  िध्यप्रदि की
                                                                                             ं
                        ै
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                                                                         े
                                                      ै
      जनसंख्या 2001 क अनुसार 60,385,118 ह जबफक इसका क्षत्रफल 308,144 फकलोिीटर ह

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      भारर् क ददल में बस मध्यप्रदि क राज्यपाल रामनरि यादि और मुख्यमंिी शििराि शसंह चौहान
                                                          े
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      हैं। मध्यप्रदि 1 निंबर, 2000 र्क क्षेिफल क आधार पर भारर् का सबसे बड़ा राज्य िा। इस
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      ददन एिं मध्यप्रदि क कई नगर उस स हटाकर छत्तीसगढ़ की स्िापना हई िी।
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                                                                                     ु
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      प्रदि  की  सीमाऐं  पाच  राज्यों  की  सीमाओं  स  शमलर्ी  हैं।  इसक  उत्तर  में  उत्तर  प्रदि,  पूिष  में
                                                                               े
      छत्तीसगढ़, दक्षक्षि में महाराष्ट्, पस्श्चम में गुिरार् र्िा उत्तर-पस्श्चम में रािस्िान ह।
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      संस्क ृ तत िें िध्यप्रदि जगिगाते दीपक क सिान : भारर् की संस्क ृ नर् में मध्यप्रदि िगमगार्े
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      दीपक क समान ह, स्िसकी रोिनी की सिषिा अलग प्रभा और प्रभाि ह। यह विशभन्द्न संस्क ृ नर्यों
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                                                                                   े
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      की अनेकर्ा में एकर्ा का िैस आकर्षक गुलदस्र्ा ह, मध्यप्रदि, स्िस प्रक ृ नर् ने राष्ट् की िेदी पर
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      िैस अपने हािों स सिाकर रख ददया ह, स्िसका सर्रगी सौन्द्दयष और मनमोहक सुगंध चारों ओर
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      फल रह हैं। यहा क िनपदों की आबोहिा में कला, सादहत्य और संस्क ृ नर् की मधुमयी सुिास र्रर्ी
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                                                                                                              ै
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      रहर्ी ह। यहा क लोक समूहों और िनिानर् समूहों में प्रनर्ददन नृत्य, संगीर्, गीर् की रसधारा
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      सहि ऱूप स फ ू टर्ी रहर्ी ह। यहा का हर ददन पिष की र्रह आर्ा ह और िीिन में आनंद रस
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                                                                   ं
      घोलकर स्मृनर् क ऱूप में चला िार्ा ह। इस प्रदि क र्ुग-उर्ुग िैल शिखर विन्द्ध्य-सर्पुड़ा, मैकल
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      -कमूर की उपस्त्यकाओं क अंर्र स गूिर्े अनेक पौराणिक आख्यान और नमषदा, सोन, शसंध, चंबल,
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                                                                                             े
      बर्िा, कन, धसान, र्िा नदी, र्ाप्ती, शिप्रा, काली शसंध आदद सर-सररर्ाओं क उद्गम और शमलन
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      की किाओं स फ ू टर्ी सहस्त् धाराएं यहा क िीिन को आप्लाविर् ही नही करर्ी, बस्ल्क पररर्ृप्त भी
                                                                                             ं
      करर्ी हैं।

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      संस्क ृ तत संगि :मध्यप्रदि में पाच लोक संस्क ृ नर्यों का समािेिी संसार ह।य पाच सास्क ृ नर्क क्षि
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      ह :-
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      1. तनिाड 2. िालर्ा  3. बुन्दलखड 4. बघेलखड 5. ग्र्ामलयर (चंबल)
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      प्रत्यक सास्क ृ नर्क क्षि या भू-भाग का एक अलग िीिंर् लोकिीिन, सादहत्य, संस्क ृ नर्, इनर्हास,
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      कला, बोली और पररिेि ह। िीिनिैली, कला, सादहत्य और िागचक परपरा शमलकर ककसी अंचल
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      की सास्क ृ नर्क पहचान बनार्ी ह।
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      मध्यप्रदि की संस्क ृ नर् विविधििी ह। गुिरार्, महाराष्ट् अििा उड़ीसा की र्रह इस प्रदि को ककसी
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      भार्ाई संस्क ृ नर् में नही पहचाना िार्ा। मध्यप्रदि विशभन्द्न लोक और िनिार्ीय संस्क ृ नर्यों का
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      समागम  ह।  यहा  कोई  एक  लोक  संस्क ृ नर्  नही  ह।  यहा  एक  र्रफ  पाच  लोक  संस्क ृ नर्यों  का
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                                                                                        ं
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      समािेिी संसार ह, र्ो दूसरी ओर अनेक िनिानर्यों की आददम संस्क ृ नर् का विस्र्ृर् फलक पसरा
      ह।
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