Page 71 - school magazine
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                                                                                                               े
       शलंगानुपार् 930 ह प्रदि की साक्षरर्ा 70.6% ह िो िबलपुर में सिागधक 82.5% ह। इसक
                                                                                                       ै
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       बाद इदौर और भोपाल का नंबर आर्ा ह। िनसंख्या घनत्ि=236/ककमी, पुरुर् साक्षरर्ा=80.5%
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       मदहला साक्षरर्ा=60.00 प्रनर्िर् ह।
       तनष्कषव                                                                                                :
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       मध्यप्रदि पाच सास्क ृ नर्क क्षि ननमाड़, मालिा, बुन्द्दलखड, बघलखड और ग्िाशलयर और धार-
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                                                                  े
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       झाबुआ, मंडला-बालाघाट, नछन्द्दिाड़ा, होिंगाबाद, खण्डिा-बुरहानपुर, बैर्ूल, रीिा-सीधी, िहडोल
       आदद िनिार्ीय क्षिों में विभक्त ह।
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       तनिाड :
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       ननमाड़ मध्यप्रदि क पस्श्चमी अंचल में अिस्स्िर् ह। अगर इसक भौगोशलक सीमाओं पर एक
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                                                                 ै
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       दृवष्ट  डाल  र्ो यह पर्ा चला ह  कक  ननमाड़  क एक ओर  विन्द्ध्य  की उर्ुग  िैल श्ृंखला और
       दूसरी र्रफ सर्पुड़ा की सार् उपस्त्यकाएं हैं, िबकक मध्य में ह नमषदा की अिस्त् िलधारा।
                                                                               ै
       पौराणिक काल में ननमाड़ अनूप िनपद कहलार्ा िा। बाद में इस ननमाड़ की संज्ञा दी गई।
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       कफर इस पूिी और पस्श्चमी ननमाड़ क ऱूप में िाना िाने लगा।
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       िालर्ा :
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       मालिा महाकवि कालीदास की धरर्ी ह। यहा की धरर्ी हरीभरी, धनधान्द्य स भरपूर रही ह।
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       यहां क लोगों ने कभी भी अकाल को नही दखा। विन्द्ध्याचल क पठार पर प्रसररर् मालिा की
                                                                             े
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       भूशम सस्य, श्यामल, सुन्द्दर और उिषर र्ो ह ही, यहा की धरर्ी पस्श्चम भारर् की सबस अगधक
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       स्ििषमयी और गौरिमयी भूशम रही ह।
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       बुदलखड :
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       एक प्रचशलर् अिधारिा क अनुसार, िह क्षि िो उत्तर में यमुना, दक्षक्षि में विंध्य प्लटों की
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                                                                                                        े
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       श्णियों, उत्तर-पस्श्चम में चंबल और दक्षक्षि पूिष में पन्द्ना, अिमगढ़ श्णियों स नघरा हआ ह,
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       बुदलखड क नाम स िाना िार्ा ह। इसमें उत्तर प्रदि क चार स्िल- िालौन, झासी, हमीरपुर
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       और  बांदा  र्िा  मध्यप्रदि  क  पांच  स्िल-  सागर,  दनर्या,  टीकमगढ़,  छर्रपुर  और  पन्द्ना  क
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       अलािा  उत्तर-पस्श्चम  में  चंबल  नदी  र्क  प्रसररर्  विस्र्ृर्  प्रदेि  का  नाम  िा।  कननंघम  ने
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       'बुदलखड क अगधकर्म विस्र्ार क समय इसमें गंगा और यमुना का समस्र् दक्षक्षिी प्रदि िो
                                                                                                               े
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       पस्श्चम  में  बर्िा  नदी  स  पूिष  में  चन्द्दरी  और  सागर  क  स्िलों  सदहर्  विंध्यिाशसनी  दिी  क
                                                                                                              ै
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       मस्न्द्दर र्क र्िा दक्षक्षि में नमषदा नदी क मुहाने क ननकट त्रबल्हारी र्क प्रसररर् िा', माना ह।
                                                     े
        बघेलखंड :
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       बघलखड  की  धरर्ी  का  संबंध  अनर्  प्राचीन  भारर्ीय  संस्क ृ नर्  स  रहा  ह।  यह  भू-भाग
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                                                                                     े
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       रामायिकाल में कोसल प्रार् क अंर्गषर् िा। महाभारर् क काल में विराटनगर बघलखड की
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       भूशम पर िा, िो आिकल सोहागपुर क नाम स िाना िार्ा ह। भगिान राम की िनगमन
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       यािा  इसी क्षि  स  हई िी। यहा  क लोगों  में  शिि,  िाक्त और  िैष्िि समप्रदाय  की  परमपरा
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       विद्यमान ह। यहां नािपंिी योगगयों का खासा प्रभाि ह। कबीर पंि का प्रभाि भी सिाषगधक ह।
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