Page 74 - school magazine
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                                    ै
       भारर् एक प्रशसद्ध दि ह स्िसने ‘विविधर्ा में एकर्ा’ क मुहािर को सात्रबर् ककया ह, िहाँ
                                                                                    े
                                                                                               ं
                                                                                 ै
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      भारर्ीय समाि में विशभन्द्न धमों को मानन िाल लोग रहर्े ह। मदहलाओ को हर धमष में
                                                                 े
                                                                           े
                                                                                              े
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      एक अलग स्िान ददया गया ह िो लोगों की आँखों को ढ़क हए बड़े पदे क रुप में और कई
                                                                               ु
                                                                              े
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      िर्ों  स  आदिष  क  रुप  में  मदहलाओं  क  णखलाफ  कई  सार  गलर्  कायों  (िारीररक  और
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                                                       े
      मानशसक) को िारी रखन में मदद कर रहा ह। प्राचीन भारर्ीय समाि दूसरी भदभािपूिष
                                                                                                        े
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      दस्र्ूरों  क  साि  सर्ी  प्रिा, नगर  िधु  व्यिस्िा, दहि  प्रिा, यौन  दहंसा, घरलू  दहंसा, गभष  में
      बस्च्चयों  की  हत्या, पदाष  प्रिा, कायष  स्िल  पर  यौन  िोर्ि, बाल  मिदूरी, बाल  वििाह  र्िा
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      दिदासी  प्रिा  आदद  परपरा  िी।  इस  र्रह  की  क ु प्रिा  का  कारि  वपर्ृसत्तामक  समाि  और
      पुरुर् श्सॎठर्ा मनोग्रस्न्द्ि ह।
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      पुरुर्  पाररिाररक  सदस्यों  द्वारा  सामास्िक  रािनीनर्क  अगधकार  (काम  करन  की  आिादी,
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      शिक्षा का अगधकार आदद) को पूरी र्रह प्रनर्बगधर् कर ददया गया। मदहलाओं क णखलाफ
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                                                 े
      क ु छ  बुर  चलन  को  खुल  विचारों  क  लोगों  और  महान  भारर्ीय  लोगों  द्वारा  हटाया  गया
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      स्िन्द्होंन मदहलाओं क णखलाफ भदभािपूिष कायों क शलय अपनी आिाि उठायी। रािा राम
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      मोहन रॉय की लगार्ार कोशििों की ििह से ही सर्ी प्रिा को खत्म करने क शलय अंग्रि
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      मिबूर हए। बाद में दूसर भारर्ीय समाि सुधारकों (ईश्वर चर विद्यासागर, आचायष विनोभा
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      भाि, स्िामी वििकानंद आदद) ने भी मदहला उत्िान क शलय अपनी आिाि उठायी और कड़ा
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      सघर्ष ककया। भारर् में विधिाओं की स्स्िनर् को सुधारन क शलय ईश्वर चर विद्यासागर न
                                                                                                                  े
      अपन लगार्ार प्रयास स विधिा पुनष वििाह अगधननयम1856 कीिुरुआर् करिाई।
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      वपछल क ु छ िर्ों में मदहलाओं क णखलाफ होन िाल लैंगगक असमानर्ा और बुरी प्रिाओं को
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      हटान  क  शलय  सरकार  द्वारा  कई  सार  सिधाननक  और  कानूनी  अगधकार  बनाए  और  लागू
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                                                         ै
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      ककय  गय  ह।  हालाँकक  ऐस  बड़े  विर्य  को  सुलझान  क  शलय  मदहलाओं  सदहर्  सभी  का
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      लगार्ार सहयोग की िरुरर् ह। आधुननक समाि मदहलाओं क अगधकार को लकर ज्यादा
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      िागरुक ह स्िसका पररिाम हआ कक कई सारे स्ियं-सिी समूह और एनिीओ आदद इस
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                                                                         े
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      ददिा में कायष कर रह ह। मदहलाए ज्यादा खुल ददमाग की होर्ी ह और सभी आयामों में
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      अपने अगधकारों को पाने क शलय सामास्िक बधनों को र्ोड़ रही ह। हालाँकक अपराध इसक
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      साि-साि चल रहा ह।
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      कानूनी अगधकार क साि मदहलाओं को सिक्त बनान क शलय ससद द्वारा पास ककय गय
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      क ु छ  अगधननयम  ह  -  एक  बराबर  पाररश्शमक  एतट  1976, दहि  रोक  अगधननयम  1961,
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                                                                                  े
      अनैनर्क व्यापार (रोकिाम) अगधननयम 1956, मडडकल टमनेिन ऑफ प्रग्नेंसी एतट 1987,
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      बाल वििाह रोकिाम एतट 2006, शलंग परीक्षि र्कनीक (ननयंिक और गलर् इस्र्ेमाल क
      रोकिाम) एतट 1994, कायषस्िल पर मदहलाओं का यौन िोर्ि एतट 2013।
                                          -  िनोज  क ु िार्त  कक्षा-  11 "र्ाणिज्य"
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