Page 73 - school magazine
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िहहला सिक्तिकरि तया ह ?
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मदहला सिडक्तकरि को बहद आसान िब्दों में
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पररभावर्र् ककया िा सकर्ा ह कक इसस मदहलाएँ
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िडक्तिाली बनर्ी ह स्िसस िो अपन िीिन स िुड़े हर
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फसल स्ियं ल सकर्ी ह और पररिार और समाि में
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अच्छ स रह सकर्ी ह। समाि में उनक िास्र्विक
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अगधकार को प्राप्त करन क शलय उन्द्हें सक्षम बनाना
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मदहला सिडक्तकरि ह।
भारत िें िहहला सिक्तिकरि की तयों जरुरत ह ?
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िैसा कक हम सभी िानर् ह कक भारर् एक पुरुर्प्रधान समाि ह िहाँ पुरुर् का हर क्षेि
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मंक दखल ह और मदहलाएँ शसफ घर-पररिार की स्िममदारी उठार्ी ह साि ही उनपर
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कई पाबंदीयाँ भी होर्ी ह। भारर् की लगभग 50 प्रनर्िर् आबादी किल मदहलाओं की ह
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मर्लब, पूर दि क विकास क शलय इस आधी आबाधी की िरुरर् ह िो कक अभी भी
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सिक्त नहीं ह और कई सामास्िक प्रनर्बधों स बधी हई है। ऐसी स्स्िनर् में हम नहीं
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कह सकर् कक भविष्य में त्रबना हमारी आधी आबादी को मिबूर् ककय हमारा दि
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विकशसर् हो पायगा। अगर हमें अपन दि को विकशसर् बनाना ह र्ो य िरुरी ह कक
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सरकार, पुरुर् और खुद मदहलाओ द्वारा मदहला सिडक्तकरि को बढ़ािा ददया िाय।
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मदहला सिडक्तकरि की िरुरर् इसशलय पड़ी तयोंकक प्राचीन समय स भारर् में लैंगगक
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असमानर्ा िी और पुरुर्प्रधान समाि िा। मदहलाओ को उनक अपन पररिार और
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समाि द्वार कई कारिों स दबाया गया र्िा उनक साि कई प्रकार की दहंसा हई और
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पररिार और समाि में भदभाि भी ककया गया ऐसा किल भारर् में ही नहीं बस्ल्क
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दूसर दिों में भी ददखाई पड़र्ा ह। मदहलाओ क शलय प्राचीन काल स समाि में चल
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आ रह गलर् और पुरान चलन को नय ररर्ी-ररिािों और परपरा में ढ़ाल ददया गया
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िा। भारर्ीय समाि में मदहलाओ को सममान दन क शलय माँ, बहन, पुिी, पत्नी क रुप
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में मदहला दवियो को पूिन की परपरा ह लककन इसका य कर्ई मर्लब नहीं कक किल
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मदहलाओ को पूिन भर स दि क विकास की िरुरर् पूरी हो िायगी। आि िरुरर् ह
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कक दि की आधी आबादी यानन मदहलाओ का हर क्षेि में सिडक्तकरि ककया िाए िो
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दि क विकास का आधार बनेंगी।
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