Page 61 - school magazine
P. 61
सहमी हई िी यह िमीन गम का सागर िा गहरा
ु
सहमा िा सारा आसमां डूबा िा स्िसमें मरा पररिार
े
े
िीिन क इस मोड़ पर दि क शलए हआ िा िहीद
े
े
ु
छाई गहरी खामोशियां।। इस बार् का िा उन्द् हें
अशभमान।।
े
हादस की गिाह
िी भारर् की सरिमीं इस हादस को दकर अंिाम
े
े
मार्ृभूशम की रक्षा में त या हआ उस िाशलम को
ु
छोड़ी ना िी कोई कमी।। नसीब
त या िीर् ली उसन य िंग
े
े
छीन शलया उस िाशलम न
े
या हआ िो, ऐ खुदा, र्ेरी
ु
े
े
मरी मां स उसका अशभमान
िन्द् नर् में िरीक।।
े
राक्षस क ऱूप में िा, ह प्रभु
े
द्र्ारा- फफजा खान ११र्ी

