Page 63 - school magazine
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बेिक, ककसी भी राष्ट् की शिक्षा नीनर् बेकार हो, लेककन एक शिक्षक बेकार शिक्षा नीनर् को भी
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अच्छी शिक्षा नीनर् में र्ब्दील कर दर्ा ह। शिक्षा क अनक आयाम हैं, िो ककसी भी दि क
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विकास में शिक्षा के महत्ि को अधोरेखांककर् करर्े हैं। िास्र्विक ऱूप में ज्ञान ही शिक्षा का
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आिय ह, ज्ञान का आकांक्षी ह- विद्यािी और इसे उपलब्ध करार्ा ह शिक्षक।
एक शिक्षक द्वारा दी गई शिक्षा ही शिक्षािी क सिाांगीि विकास का मूल आधार
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ह। प्राचीनकाल स आिपयांर् शिक्षा की प्रासगगकर्ा एि महत्ता का मानि िीिन में
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वििेर् महत्ि ह। शिक्षकों द्वारा प्रारभ स ही पाठ्यिम क साि ही साि िीिन मूल्यों की
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शिक्षा भी दी िार्ी ह। शिक्षा हमें ज्ञान, विनम्रर्ा, व्यिहारक ु िलर्ा और योग्यर्ा प्रदान करर्ी ह।
शिक्षक को ईश्वरर्ुल्य माना िार्ा ह।
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आि भी बहर् से शिक्षक, शिक्षकीय आदिों पर चलकर एक आदिष मानि समाि
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की स्िापना में अपनी महर्ी भूशमका का ननिषहन कर रह हैं। लककन इसक साि-साि ऐस
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भी शिक्षक हैं, िो शिक्षक और शिक्षा क नाम को कलककर् कर रह हैं और ऐस शिक्षकों
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ने शिक्षा को व्यिसाय बना ददया ह स्िससे एक ननधषन शिक्षािी को शिक्षा से िंगचर्
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रहना पड़र्ा ह और धन क अभाि से अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़र्ी ह।
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आधुननक युग में शिक्षक की भूशमका अत्यर् महत्िपूिष ह। शिक्षक िह पि-प्रदिषक होर्ा
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ह, िो हमें ककर्ाबी ज्ञान ही नहीं, बस्ल्क िीिन िीन की कला शसखार्ा ह। आि क समय
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में शिक्षा का व्यिसायीकरि और बािारीकरि हो गया ह। शिक्षा का व्यिसायीकरि
और बािारीकरि दि क समक्ष बड़ी चुनौर्ी हैं।
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पुरान समय में भारर् में शिक्षा कभी व्यिसाय या धधा नहीं िी। इसस िर्षमान छािों को बड़ी
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कदठनाई का सामना करना पड़ रहा ह। शिक्षक ही भारर् दि को शिक्षा क व्यिसायीकरि
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और बािारीकरि स स्िर्ि कर सकर्े हैं। दि क शिक्षक ही पि-प्रदिषक बनकर भारर् में
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शिक्षा िगर् को नई बुलददयों पर ल िा सकर्े हैं।
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गुरु एि शिक्षक ही िो हैं, िो एक शिक्षािी में उगचर् आदिों की स्िापना करर्े हैं और
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सही मागष ददखार्े हैं। एक शिक्षािी को अपन शिक्षक या गुरु क प्रनर् सदा आदर और
क ृ र्ज्ञर्ा का भाि रखना चादहए। ककसी भी राष्ट् का भविष्य ननमाषर्ा कह िाने िाले शिक्षक
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का महत्ि यहीं समाप्त नहीं होर्ा, तयोंकक िे न शसफ हमको सही आदिष मागष पर चलने क
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शलए प्रररर् करर्े हैं बस्ल्क प्रत्यक शिक्षािी क सफल िीिन की नींि भी उन्द्हीं क हािों द्वारा
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रखी िार्ी ह। ककसी भी दि या राष्ट् क विकास में एक शिक्षक द्वारा अपन शिक्षािी को दी
गई शिक्षा और िैक्षक्षक विकास की भूशमका का अत्यर् महत्ि ह।
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आि (5 शसर्बर 2017) शिक्षक ददिस ह। आि का ददन गुरुओ और शिक्षकों को
अपने िीिन में उच्च आदिष िीिन-मूल्यों को स्िावपर् कर आदिष शिक्षक और एक आदिष
गुरु बनने की प्रेरिा दर्ा ह।
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चेतन परिार कक्षा - 11 "र्ाणिज्य"

